सुबह का नित्यनियम (लिखित) | Nitya Niyam by SantRampal Ji Maharaj | SatlokAshram | Satrangi TV
सुबह का नित्यनियम: परमात्मा की भक्ति और मानसिक शांति का सरल मार्ग
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब शांति की तलाश में हैं। सुबह की शुरुआत अगर सही ऊर्जा और सात्विक विचारों के साथ हो, तो पूरा दिन सकारात्मक बीतता है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताया गया ‘सुबह का नित्यनियम’ केवल मंत्रों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह पूर्ण परमात्मा की स्तुति और मोक्ष प्राप्ति का एक विधान है।
नित्यनियम क्या है और यह क्यों जरूरी है?
नित्यनियम का अर्थ है वह नियम जो प्रतिदिन (Daily) किया जाए। जिस तरह शरीर को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, उसी तरह आत्मा की खुराक ‘नाम सिमरन’ और ‘नित्यनियम’ है।
संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में बताए गए इस नित्यनियम में असुर निकंदन रमैणी और मंगलाचरण जैसी पावन वाणियाँ शामिल हैं, जो हमारे सूक्ष्म शरीर की शुद्धि करती हैं और हमें मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती हैं।
सुबह के नित्यनियम के मुख्य लाभ:
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मानसिक शांति: सुबह-सुबह परमात्मा की वाणी सुनने या पढ़ने से मन शांत और एकाग्र होता है।
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नकारात्मकता का नाश: घर में सुख-शांति का वास होता है और क्लेश दूर होते हैं।
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साधना की पूर्णता: यह भक्ति मार्ग का पहला कदम है, जो साधक को सतलोक (अमर लोक) की राह पर आगे बढ़ाता है।
विशेष संदेश: “परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि जो भक्त नियम से भक्ति करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।”
लिखित नित्यनियम (Nitya Niyam Written)
भक्तों की सुविधा के लिए हमने यहाँ वीडियो के साथ-साथ लिखित नित्यनियम भी उपलब्ध कराया है। कई बार वीडियो देखना संभव नहीं होता, ऐसे में आप इसे पढ़कर अपनी साधना पूरी कर सकते हैं। यह वाणी सूक्ष्म वेद से ली गई है, जो कबीर साहेब की असली शिक्षाओं को दर्शाती है।
निष्कर्ष
यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और मोक्ष चाहते हैं, तो प्रतिदिन नियमपूर्वक सुबह का नित्यनियम अवश्य करें। यह न केवल आपके इस लोक के दुखों को कम करेगा, बल्कि परलोक का रास्ता भी साफ करेगा।
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