श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को समझना हर जिज्ञासु के लिए अनिवार्य है। अक्सर लोग समझते हैं कि गीता का ज्ञान देने वाला ही सर्वशक्तिमान है, लेकिन Gita Adhyay 18 Shlok 62 एक ऐसा गहरा राज खोलता है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा। इस श्लोक में स्वयं गीता बोलने वाला प्रभु अर्जुन को किसी ‘अन्य’ परमेश्वर की शरण में जाने का आदेश दे रहा है। आइए जानते हैं वह पूर्ण परमात्मा (Supreme God) कौन है।
Gita Adhyay 18 Shlok 62 का मूल श्लोक और अर्थ
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत। तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्।।62।।
सरल हिंदी अनुवाद (Hinglish Translation): हे भारत (अर्जुन)! तू सब प्रकार से उस ‘एक’ (तमेव) ही परमेश्वर की शरण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू ‘परम शान्ति’ (Param Shanti) को और ‘सनातन परम धाम’ (Sanatan Dham – Satlok) को प्राप्त होगा।
इस श्लोक के अनसुने रहस्य (Deep Secrets)
इस श्लोक का विश्लेषण करने पर 3 मुख्य बातें सामने आती हैं जो पूर्ण मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं:
- “तमेव” (Tamev) शब्द का महत्व: गीता ज्ञानदाता अर्जुन से यह नहीं कह रहा कि “तू मेरी शरण में आ”, बल्कि वह कह रहा है कि “उस (Tamev)” की शरण में जा। इससे सिद्ध होता है कि गीता बोलने वाले भगवान से ऊपर भी कोई और सर्वोच्च शक्ति है।
- परम शान्ति (Ultimate Peace): इस संसार में (जो नाशवान है) पूर्ण शांति संभव नहीं है। गीता ज्ञानदाता स्पष्ट कर रहा है कि असली और स्थायी शांति केवल उस पूर्ण परमात्मा की शरण में ही मिल सकती है।
- शाश्वत स्थान (The Eternal Place): यहाँ ‘शाश्वत स्थान’ का अर्थ है सतलोक (Satlok), जहाँ जाने के बाद मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
कौन है वह पूर्ण परमात्मा? (Who is the Supreme God?)
वेदों, पुराणों और कबीर वाणी के अनुसार वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब (Kabir Saheb) हैं। गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में भी इसी ‘उत्तम पुरुष’ यानी ‘परमात्मा’ का ज़िक्र है जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है।
संत रामपाल जी महाराज (Sant Rampal Ji Maharaj) अपने सत्संगों में शास्त्रों के माध्यम से प्रमाणित करते हैं कि वह ‘तमेव’ परमात्मा कबीर साहेब ही हैं, जिनकी जानकारी एक तत्वदर्शी संत ही दे सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अगर आप जन्म-मरण के दुखों से छुटकारा पाना चाहते हैं और उस ‘शाश्वत स्थान’ (सतलोक) को प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको उस पूर्ण परमात्मा की खोज करनी होगी जिसकी ओर इशारा Gita Adhyay 18 Shlok 62 में किया गया है।

