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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 श्लोक 9: क्या कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा (KavirDev) हैं?

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आज के समय में अध्यात्म को समझना थोड़ा कठिन हो गया है, क्योंकि असली गूढ़ रहस्य आम जनता की पहुँच से दूर हैं। श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagavad Gita) एक ऐसा ग्रंथ है जो हर उलझन का हल देता है। आज हम चर्चा करेंगे Gita Adhyay 8 Shlok 9 के बारे में, जिसमें गीता ज्ञान देने वाले भगवान ने उस ‘पूर्ण परमात्मा’ (Supreme God) के बारे में बताया है जो सबका पालन-पोषण करता है और जिसे ‘कविर्देव’ (Kabir Saheb) कहा जाता है।

Gita Adhyay 8 Shlok 9 का मूल श्लोक और अर्थ

कविम् पुराणम् अनुशासितारम् अणोः अणीयांसम् अनुस्मरेत् यः। सर्वस्य धातारम् अचिन्त्यरूपम् आदित्यवर्णम् तमसः परस्तात्।।9।।

इस श्लोक में परमात्मा के 8 विशेष गुणों के बारे में बताया गया है, जो सीधे तौर पर कबीर साहेब (Kabir Saheb) की ओर संकेत करते हैं:

  1. कविम् (Kavim): इसका गहरा अर्थ है ‘कविर्देव’ यानी कबीर परमेश्वर। वह परमात्मा जो कवि के रूप में प्रसिद्ध होता है और अपनी वाणी (कविताओं) के जरिए ज्ञान देता है।
  2. पुराणम् (Puranam): वह जो अनादि है, जिसका कोई अंत नहीं।
  3. अनुशासितारम् (Anushasitaram): जो पूरे ब्रह्मांड का शासक और न्यायकारी है।
  4. सर्वस्य धातारम् (Sarvasya Dhataram): जो सभी जीवों का धारण और पोषण करने वाला (Maintainer) है।
  5. आदित्यवर्णम् (Adityavarnam): जिसकी काया सूर्य के समान तेजस्वी और प्रकाशमान है।
  6. तमसः परस्तात् (Tamasah Parastat): जो अज्ञान के अंधकार से बहुत दूर अपने निज धाम (Satlok) में रहता है।

Kabir Saheb is God: गीता के इस श्लोक का असली रहस्य

ज्यादातर अनुवादकों ने ‘कविम्’ शब्द का अर्थ ‘सर्वज्ञ’ या ‘ज्ञानी’ कर दिया है, लेकिन वेदों और सूक्ष्म वेद (कबीर वाणी) के अनुसार ‘कविर्देव’ (KavirDev) उस परमात्मा का वास्तविक नाम है।

  • Purna Parmatma Ka Praman: गीता ज्ञान देने वाला (जो खुद जन्म-मरण में है) कह रहा है कि उस ‘कविम्’ (कबीर साहेब) का सुमरण करो, जो अचिंत्य स्वरूप है।
  • Kashi Me Prakat: वही परमात्मा 600 साल पहले काशी (वाराणसी) में एक बुनकर/जुलाहे के रूप में प्रकट हुआ था और अपनी ‘कबीर वाणी’ के माध्यम से तत्वज्ञान सुनाया था।

निष्कर्ष (Conclusion)

Gita Adhyay 8 Shlok 9 साफ़ गवाही देता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के ऊपर भी एक समर्थ शक्ति है, जिसे शास्त्रों में ‘धातारम्’ और ‘कविर्देव’ कहा गया है। पूर्ण मोक्ष प्राप्त करने के लिए उस अविनाशी परमात्मा की भक्ति अनिवार्य है।

सत्य भक्ति और पूर्ण गुरु की जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनें।

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